बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

तुम पहनो या न पहनो तुम्हारी मुस्कान गहना !!

प्रीत का पावन महीना
और तुम्हारा व्यस्त रहना
बताओ प्रिय और कब तक
पड़ेगा मुझको ये सहना ?

चेतना में तुम ही तुम हो
संवेदना में भी तो तुम हो !
तुम पहनो या न पहनो
तुम्हारी मुस्कान गहना !!

लबों का थोड़ा सा खुलना
पलक का हौले से गिरना
समझ लेता हूं प्रिया तुम
चाहती हो क्या है कहना !!

मदालस हैं स्वर तुम्हारे
सहज हो  जब जब उचारे !
तुम्हारी सखियां हैं चंचल
उनसे तुम कुछ भी न कहना

5 टिप्‍पणियां:

  1. फ़ेस बुक पर अभिषेक बिल्लोरे जी ने कहा -
    Abhishek Billore aapku rachna blog par padhi... bahut hi unmukt aur preysi ke dil me utarkar us ke hriday me halchal utpann karne wali rachna....
    mobile se login hu ath blog par tippani karne me asamarth hu... isiliye yahan par tippani ki hai....

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  2. बहुत ही सुन्दर कविता प्रीतम के लिए,आभार।

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