मंगलवार, 25 सितंबर 2012

प्रीत के दोहे

साभार : आशा सक्सेना जी 
के ब्लाग आकांक्षा से 



मन मोहन संग रास-रस,अंग-अंग बस जाय!
अनुभव मत पूछो सखि ,मोसे कहो नै जाय !!
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देखूं तो प्रिय के नयन,सुनूं तो प्रिय के गीत !
हिय हारी मैं तुम कहो, जानूं मैं जा जीत !!
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मैं प्रियतम की बावरी,प्रीत रंग चहुँ ओर !
आयो सावन बावरो,लैं संग पीर अछोर !!
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तापस तोरी साधना, तन मेरो झुलसाय,
तोरे दिव्य सरूप में, नारायन दिख जाय !!

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