रविवार, 17 जून 2012

बेसुधी में सड़क पर चलते चलते

बेसुधी में
सड़क पर चलते चलते
तुम्हारी यादों के घने बादल
जब बरसने लगते हैं
पोर पोर
भिगो देती बूंदें
थम जातीं हैं फ़िर अचानक
तब जब
रिक्शे वाला-चलो हटो कहता
बाजू से निकल जाता है..
और वेदना उष्णता
महसूस करता हूं..
ठीक वैसे ही
जैसे तपती दोपहर
अचानक मेह बरस के
थम जाते हैं ..
और उमस
उभरती है...!!

1 टिप्पणी:

  1. और वेदना उष्णता
    महसूस करता हूं..
    ठीक वैसे ही
    जैसे तपती दोपहर
    अचानक मेह बरस के
    थम जाते हैं ..
    और उमस
    उभरती है...!!
    वाह... सुन्दर अभिव्यक्ति... आभार

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