मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

प्रिया हो तुम तो रंगरेजन सी..तुमको पत्थर रंगना आता !!

मन में आकर तुम ने मेरे पीर भरा जोड़ा क्यों नाता .
अपनी अनुबंधित शामों से क्यों कर तोड़ा तुमने नाता
मैं न जानूं रीत प्रीत की, तुम ने लजा लजा सिखलाई..
इक अनबोली कहन कही अरु राह प्रीत की मुझे दिखाई
इक तो मन मेरा मस्ताना-मंद मंद तेरा मुस्काना ..
भले दूर हो फ़िर तुमसे.. बहुत गहन है मेरा नाता..!!
मन में आकर तुम …………………………………..!!
उर मेरे आ बसे सलोने, सपन तुम्हारे ही कारन हैं,
कैसे “प्रीत-अर्चना” कर लूं..? मन का भी तो अनुशासन है.
मेरा पल पल रंगा है तुमने, सपने तुमने लिये वसंती-
प्रिया हो तुम तो रंगरेजन सी..तुमको पत्थर रंगना आता !!
मन में आकर तुम …………………………………..!!

11 टिप्‍पणियां:

  1. मेरा पल पल रंगा है तुमने, सपने तुमने लिये वसंती-
    प्रिया हो तुम तो रंगरेजन सी..तुमको पत्थर रंगना आता !!

    सुंदर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  2. भले दूर हो फ़िर तुमसे.. बहुत गहन है मेरा नाता..!!

    वाह... बहुत खूबसूरत रचना... आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी पोस्ट चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.in/2012/04/847.html
    चर्चा - 847:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह जी ...बढिया है ये प्रीत निराली सी

    उत्तर देंहटाएं
  5. भैया बहुत सटीक है, भौजी जी मनमार |
    दर्दे दिल की दें दवा, प्यार भरा उपहार |

    प्यार भरा उपहार, पीर तो अरुण-किरण है |
    फैले अब उजियार, प्रस्तर राम चरण है |

    तरेगी गौतम नार, जमा मिष्ठान खवैया |
    रविकर भी है साथ, साथ हैं भाभी भैया ||

    dineshkidillagi.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

टिप्पणियाँ कीजिए शायद सटीक लिख सकूं