मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

भीगे नयन बता ही देंगे कैसे तुम ने रात बिताई


भीगे नयन बता ही देंगे
कैसे तुम ने रात बिताई
कैसे व्यक्त करें हम बोलो
कैसी अपनी थी तन्हाई.
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कभी तुम्हारे सपने ... देखे
कभी तुम्ही में सपने देखे !
शाल-दुशाले ओढ़ के हमने
कोशिश की थी सपने देखें.
  कोशिश बहुत हुई थी फ़िर भी प्रियतम भोर भए तक नींद न आई..
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मन वियोगवन का मृग छौना -
देह ! देह क्या.. एक  खिलौना !
पल-छिन बस  आभास  तुम्हारा-
तुम बिन क्षण युग सा,मास-बरस सब कुछ  बौना !
  कोशिश बहुत हुई थी फ़िर भी प्रियतम अंजोरी तक रास न  आई..
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