सोमवार, 20 जून 2011

मेरे गीतों में बसो प्रिये फ़िर लौट के घर न जाया करो !!

जो तुमने कहा मुझे याद नहीं
 कई बार कहो कहती ही रहो
तुम तन्हां नहीं मैं साथ में हूं, 
आभासों में  मिल जाया करो
 आभासों इस दुनियां में 
  एक सच्चा साथी जो मिल जाये-
  भंवर-भटकते जल चर को 
   तिनके का सहारा मिल जाए .
                मेरे घावों पे आकर तुम- धीरज मरहम मल जाया करो  !
  मन साफ़ तौर पे कहता ये-
  है प्यार तुम्हीं से ओ पावन
   तुम चाहे जी जितना करलो, 
    मेरे कथनों का अनुमापन
                 मेरे गीतों में बसो प्रिये फ़िर  लौट के घर न जाया करो !!
     तुम  अपनी मधुरिम यादों को
     कब तक रखोगी सीने पर ,
      जो असर डालतीं हैं अक्सर
       सांसों पे अरु जीने पर 
       कभी कभी एक बार मुझे अपनी बातें कह जाया करो !!




  

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