मंगलवार, 19 अक्तूबर 2010

मेरी कविता कई भाषाओ में अनुवादित

गूगल बाबा  की करामात ही है कि मेरी कविता हिन्दी से अंग्रेजी ,जर्मन,चीनी,फ़्रेंच ,रशियन ,भाषाओं में  अनुवादित हो गई है. ,
कविता
तुम मैं और हम सब
चुनते हैं  ज़िंदा सुलगते सवाल
 सवाल जो सुर्ख हैं
उन घावों की तरह
जिनसे बहता  है खून
जो अब नहीं उबलता
बस बहता है हमारी नसों  पर या
सडकों पर
बस केवल सिद्ध करने "श्रेष्ठता"
मैं सोचता हूँ  कह दूं
मानव जनित आपदाओं से
रुक जाओ एक पल के लिए
मैं जीना चाहता हूँ   .....
एक पल शान्ति के साथ
जिससे मुझे  प्रेम है ..!!  

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी जानकारी के लिए आभार .

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  2. जर्मन भाषा मे तो अनर्थ कर रखा हे जी :)

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  3. ما هو عليه ، كما نرى أنه كان مجرد متعة الحديث مثل أصدقائنا الفلسطينيين في اللغة العربية
    ऐसे क्या देख रहे हैं जो हमने लिखा है उसका यह अरबी मे अनुवाद है . लेकिन मशीन का अनुवाद है भाई यह अर्थ का अनर्थ भी कर देता है

    क्या बात है , यह देखकर ही मज़ा आ गया हम अपने फिलीस्तीन के दोस्तों से ऐसे ही अरबी में बात करते हैं

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  4. बहुत अच्छा लगा ,,,,,
    गिरीश जी बधाई स्वीकार करें...

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