रविवार, 8 अगस्त 2010

हमें तो लूट लिया

हुस्न वालों पर इस क़व्वाली में इल्ज़ाम  लगाने वालों की लम्बी फ़ेहरिश्त है कुछ नमूने आज़ यहां कुछेक नमूने यानी बानग़ी देखिये सुनिये
ये भी मज़ेदार है न :- 

कराओके में सुर मिलाना है तो हाज़िर है संगीत :-

नये दौर में यूं गाया :-

,मीत जी के खज़ाने में ये था  :-

सीमा पार की कसरत देखिये ज़नाब :-

6 टिप्‍पणियां:

  1. bahut badhiya hai dada
    purane se naye tak ka safar.

    manpasand Qvvali sunane ka aabhaar

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  2. बहुत समय लगता है आप की साईद को डाऊन लोड होने मै

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  3. अपनी पोस्ट के प्रति मेरे भावों का समन्वय
    कल (9/8/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
    और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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  4. वाह! बहुत बढिया प्रस्तुति।आभार।

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