रविवार, 13 जून 2010

तेरा चेहरा आईने जैसा : जगजीत सिंग

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह क्या बात है ? तेरा चेहरा है आइने जैसा .. खूबसूरत गज़ल और वह भी रात के एक बज़े सुनने का मज़ा ही कुछ और है .. और सुनने के साथ उस के बारे मे लिखने का मज़ा ही कुछ और है ।
    "दोस्त मिल जायेंगे कई लेकिन ,न मिलेगा कोई मेरे जैसा "
    अरे ये गिरीश बिल्लोरे है ना वो ऐसा ही कुछ करते है .. अब रात को एक बजे कह रहे हैं .. जीजू.. ये गज़ल तो सुन लो ..और लिंक भेज दी । लो भई सुन लिये और आनन्द भी ले लिये .. अब आप धन्यवाद तो ले लो ।

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  2. बहुत बढिया गीत .. आपका आभार !!

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  3. बहुत सुन्दर
    सुकून सा आ गया सुनकर

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  4. आईये जानें .... क्या हम मन के गुलाम हैं!

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