बुधवार, 30 सितंबर 2009

ध्वनि-हीन संवाद

 
तुम और मैं
ध्वनि-हीन संवादरत !
तुम-और मैं
नि:शब्द
मैं अनुशासनवश
तुम लज्जावश
फ़िर भी निरंतर
ध्वनि-हीन संवादरत ..!!
ध्वनि-हीन-संवाद
जी भर जीवन भर 
बुल्ले-शाह...मीरा...
सूर..........कबीरा
सब....ने किया
प्रेम का प्याला पिया !
सच जाता  है
 इसी तरह जीवन जीया 

3 टिप्‍पणियां:

  1. तुम-और मैं
    नि:शब्द
    मैं अनुशासनवश
    तुम लज्जावश
    ध्वनिहीन इस संवाद के क्या कहने
    बहुत सुन्दर

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  2. ध्वनि रहित संवाद...बहुत खूबसूरत होते हैं। सच आपकी इस रचना की तरह

    उत्तर देंहटाएं
  3. तुम और मैं
    ध्वनि-हीन संवादरत !
    तुम-और मैं
    नि:शब्द
    मैं अनुशासनवश
    तुम लज्जावश
    फ़िर भी निरंतर
    laazwab .

    उत्तर देंहटाएं

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